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काव्यधारा द्वारा काव्यगोष्ठी का आयोजन

काव्यधारा द्वारा काव्यगोष्ठी का आयोजन

यों तो लंदन में कई हिंदी सेवी संस्थाएं हैं और समय-समय पर उनके द्वारा हिंदी कार्यक्रमों के आयोजन किए जाते रहते हैं। लेकिन काव्यधारा एकमात्र ऐसी हिंदी सेवी संस्था है जो नियमित रूप से हर तिमाही में काव्यगोष्ठी का आयोजन करती है और इस आयोजन के पीछे विशुद्ध रूप से भारतीय भाषा, साहित्य तथा संस्कृति के प्रति समर्पण का भाव होता है। अपने नाम के अनुरूप ही इसकी गोष्ठियों में काव्य की धारा बहती है। ऐसी ही एक काव्यगोष्ठी 18 मई 2018 की शाम पर्थ रोड, इलफोर्ड स्थित कंचन रेस्टोरेंट में आयोजित की गई जिसमें लगभग 50 लोग उपस्थित थे। सायं 8.00 बजे आरंभ हुई यह काव्यगोष्ठी रात के दस बजे तक चली। कार्यक्रम पूरी तरह भारतीय भाषाओं और संस्कृति पर केंद्रित था। काव्यधारा के अध्यक्ष श्री सैम बख्शी ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया और भारतीय संस्कृति और भाषाओं के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का संचालन काव्यधारा की महासचिव श्रीमती इंदिरा आनंद ने किया। गोष्ठी में काव्यपाठ करनेवालों में मुख्य रूप से श्री चमन लाल चमन, श्रीमती उषा राजे सक्सेना, श्री रिफत शमीम, राज माडगिल, कंचन बख्शी, रानी धवन, स्नेह लाल, विजय भंडारी, श्री सुभाष आनंद, आदि शामिल थे। भारत का उच्चायोग, लंदन में हिंदी व संस्कृति अधिकारी श्री तरुण कुमार ने भी इस अवसर पर काव्यपाठ किया। जहां रिफत शमीम ने अपनी ग़ज़लों और गीतों से समां बांधा वहीं चमन लाल चमन ने अपनी ग़ज़लों से इस काव्यगोष्ठी को नई ऊंचाई दी। रिफत शमीम के गीत -

नैन में सावन भर के गोरी काहे नीर बहाए,

सांझ भई अंजान दिशा पर किसका दीप जलाए.-

उस शाम की यादगार पेशकश थी। अन्य रचनाकारों ने भी उत्कृष्ट कविता पाठ किया। इस कार्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें किसी भी रचनाकार को छोटा या बड़ा नहीं माना जाता है। सभी कवि समान भाव से एक दूसरे की रचनाएं सुनते हैं और बेहतर से बेहतर लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस गोष्ठी की एक और सकारात्मक बात यह है कि इसमें अन्य भाषा भाषियों को भी अपनी रचनाएं सुनाने की छूट है। इससे दूसरी भाषाओं के लोग भी हिंदी से जुड़ते हैं।

निश्चय ही इस प्रकार का आयोजन नए रचनाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर लिखने के लिए प्रोत्साहित भी करता है। नए व पुराने रचनाकार अपने परिवेश की नई संवेदनाओं को अपनी रचनाओं में लाकर संपूर्ण हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। काव्यधारा द्वारा आयोजित हर काव्यगोष्ठी प्रवासी हिंदी साहित्य व अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य में कुछ नया जोड़ने का काम करती है।

अंत में काव्यधारा की सोशल सेक्रेटरी डॉ. निम्मी आनंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। काव्यपाठ के बाद संगीत व सुस्वादु भोजन की व्यवस्था थी। कुल मिलाकर यह बहुत ही सफल कार्यक्रम रहा।

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