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भारत का उच्चायोग, लंदन में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन

भारत का उच्चायोग, लंदन में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन

13 जून 2018 को भारत का उच्चायोग, लंदन के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद और आधारशिला विश्व हिंदी मिशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें उत्तराखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में भारत से आए साहित्यकारों/पत्रकारों/शिक्षको आदि के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और स्थानीय हिंदी विद्वानों/हिंदी प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय हिंदी साहित्यकारों/हिंदी सेवियों में डा. कृष्ण कुमार, श्री तेजेंद्र शर्मा, ज़ाकिया ज़ुबैरी, श्रीमती उषा राजे सक्सेना, दिव्या माथुर, अरूण सभरवाल, अरुणा अजितसरिया, कादंबरी मेहरा, श्री केबीएल सक्सेना, श्रीराम शर्मा मीत, काउंसलर ग्रेवाल आदि शामिल हैं।

18-20 अगस्त तक मॉरिशस में आयोजित 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन की पृष्ठभूमि में आयेाजित इस कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकारों से 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने के लिए शीघ्र ही पंजीकरण कराने का अनुरोध किया गया।

इस अवसर पर मंत्री (समन्वय) श्री ए.एस.राजन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान भी है और इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों से इस पहचान को मजबूती मिलती है। साथ ही, भारत से आए साहित्यकारों और स्थानीय साहित्यकारों के बीच विचार-विमर्श का भी अवसर मिलता है। उन्होंने ब्रिटेन में लिखे जा रहे हिंदी साहित्य की सराहना की और हिंदी के प्रचार-प्रसार की दिशा में उच्चायोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया।

उत्तराखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि राजनीति बांटती है लेकिन भाषा जोड़ती है। हिंदी सारे समाज को जोड़ने का काम कर रही है। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विदेशों में किए जा रहे प्रयासों और प्रवासी साहित्यकारों की भी प्रशंसा की। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सिनेमा के विशेषज्ञ की हैसियत से भारत से आए पत्रकार श्री अजित राय ने हिंदी के वैश्विक-प्रचार में हिंदी सिनेमा के योगदान को रेखांकित किया। डा. कृष्ण कुमार ने हिंदी के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की, वहीं तेजेंद्र शर्मा ने प्रवासी साहित्य के सामने जो चुनौतियां हैं उनका जिक्र किया।

लगभग ढाई घंटे चले इस कार्यक्रम में हिंदी सम्मेलनों का लघु रूप देखने को मिला, जैसे कि पुस्तकों की प्रदर्शनी, चित्रकला प्रदर्शनी, काव्यपाठ, ग़़ज़ल और गीत, और विभिन्न विद्वानों द्वारा वक्तव्य और विचार-विमर्श।

आधारशिला के संपादक डॉ दिवाकर भट्ट ने स्थानीय साहित्यकारों और भारत से आए हिंदी सेवियों को सम्मानित किया। कई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ जिनमें स्थानीय साहित्यकारों में श्री श्याम मनोहर पांड की दाउद कृत चंदायन की व्याख्या-दो खंडों में, तिथि दानी का काव्य संग्रह प्रार्थनारत बत्तखें, कादंबरी मेहरा की चाय की विश्व यात्रा, डा. कृष्ण कुमार की जो हम अब तक भूल न पाए, और भारत से आए हिंदी साहित्यकारों में डा. भगवान लाल वंशीवाल की कश्ती किनारा चाहती है, मो. इकबाल आजर का ग़ज़ल संग्रह डगर डगर तन्हा, आदि शामिल हैं। इसके अलावा हिंदी के कई विषयों यथा हिंदी देश से दुनिया तक, हिंदी और विज्ञान, आदि पर अलग-अलग विद्वानों ने अपने विचार रखे। सूत्रधार की भूमिका अताशे (हिंदी व संस्कृति) श्री तरुण कुमार की थी। कुल मिलाकर बहुत कम समय में आयोजित एक सफल कार्यक्रम था।